August 25, 2026
Patna , Bihar
Bihar Politics

Bihar News : रोहिणी के सोशल मीडिया पोस्ट पर क्यों छिड़ी बहस? समर्थकों ने भी दी सलाह

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लालू प्रसाद यादव और रोहिणी आचार्या

राष्ट्रीय जनता दल में सांगठनिक कदम उठाते हुए पार्टी की सभी इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग कर दिया गया। इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग कर दिए जाने के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए रोहिणी आचार्य ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने पार्टी नेतृत्व को एक कड़ा संदेश और सलाह भी दी है। हालाँकि उनके इस सलाह पर कार्यकर्ताओं ने भी जमकर बहस की है।

निर्णय में हुई देरी, कट्टर लालूवादियों को मिले जगह

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि पार्टी इकाइयों को भंग करने का फैसला सही है, लेकिन इसमें काफी देर हुई है। उन्होंने कहा है कि पार्टी की जिन इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग करने का निर्णय लिया गया है, वह काफी पहले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने नई टीमों के पुनर्गठन को लेकर स्पष्ट उम्मीदें जताई हैं।

निष्ठावानों को मिले प्राथमिकता

 रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए यह सन्देश दिया है कि सालों से पार्टी के साथ पूरी निष्ठा और समर्पण से खड़े कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने कहा है कि नए संगठन में कट्टर लालूवादियों और संगठन की गहरी समझ रखने वाले नेताओं को आगे लाया जाए। साथ ही धरातल पर काम करने वाले और संघर्षशील कार्यकर्ताओं को जगह दी जानी चाहिए तभी पार्टी आगे जा सकेगी।

लालू जी के सिद्धांतों से ही पार्टी की बेहतरी

रोहिणी आचार्य ने लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से हाशिए पर खड़े लोगों को आगे लाना ही हमेशा से राजद की मूल विचारधारा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्यकर्ताओं को उचित अवसर और पद देना ही सदैव लालू जी की प्राथमिकता रही है। केवल लालू जी के सिद्धांतों और उनके दिखाए रास्ते पर चलकर ही पार्टी का भला संभव है।

समर्थकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

रोहिणी की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर राजद समर्थकों के बीच बहस छिड़ गई है। जहां एक वर्ग रोहिणी आचार्य के इस बेबाक रुख का समर्थन करते हुए इसे पार्टी के पुनरुद्धार के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे पार्टी के आंतरिक असंतोष या संगठनात्मक बदलावों के बीच दबाव की रणनीति के रूप में देख रहा है।

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