सरकारी फाइलों में जीरो टॉलरेंस और डिजिटल निगरानी के तमाम दावों के बीच बिहार के सारण जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सारण जिले के एकमा प्रखंड की महज दो पंचायतों- बनपुरा और परसा दक्षिणी, में ही विकास योजनाओं के ₹2.75 करोड़ से अधिक की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। 15वें और छठे राज्य वित्त आयोग की आवंटित राशि में बैंक खातों और आधिकारिक रोकड़ बही के बीच सीधे ₹2.75 करोड़ का अंतर पाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मजदूरों की दिहाड़ी की राशि उनके खातों में भेजने के बजाय सीधे पंचायत सचिव के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
कागजों पर सड़कें, एक सेप्टिक टैंक पर तीन शौचालय
स्थानीय स्तर पर हुई शुरुआती जांच और बैंक दस्तावेजों के मिलान से पता चला है कि धरातल पर बिना कोई निर्माण कार्य कराए केवल कागजों पर सड़कें दिखाकर भुगतान उठा लिया गया।
अधूरी ढलाई और शिलान्यास पट्ट गायब: ग्रामीणों का आरोप है कि परसा दक्षिणी पंचायत के वार्ड नंबर-5 स्थित मध्य विद्यालय एकरीपुर प्रांगण में नियमानुसार 6 इंच मोटी पीसीसी सड़क बननी थी। लेकिन मौजूदा स्थिति में सड़क महज 3 इंच मोटी ही दिख रही है, जबकि भुगतान पूरे 6 इंच के हिसाब से उठाए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा, निर्माण स्थल से शिलान्यास पट भी गायब है।
भौतिक मापक और मापी पुस्तिका में अंतर: बनपुरा पंचायत में मुख्य सड़क से हरेराम उपाध्याय के घर तक बनने वाली सड़क की स्वीकृत मोटाई 6 इंच (400 घन फीट) थी। धरातल पर जांच करने पर पाया गया कि काम केवल 4 इंच मोटाई यानी 302.50 घन फीट ही किया गया, जबकि मापी पुस्तिका में 262 घन फीट की फर्जी एंट्री दर्ज की गई है।
शौचालय निर्माण में अनोखा फर्जीवाड़ा: स्वच्छ भारत मिशन के तहत परसा दक्षिणी पंचायत में एक ही सेप्टिक टैंक के ऊपर तीन अलग-अलग महिला लाभार्थियों पूनम देवी, हीरा देवी और चन्द्रवती देवी के नाम पर शौचालय निर्माण दिखाकर ₹36,000 यानी प्रति लाभार्थी ₹12,000 रुपए का भुगतान उठा लिया गया।

ऊपर तक पहुंचाना पड़ता है हिस्सा
प्रधानमंत्री आवास योजना में भी लाभार्थियों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सूची में नाम जोड़ने और किस्त जारी करने के बदले खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही है। इस मामले में आवास सहायक वीरेंद्र कुमार पर आरोप है कि पैसे न देने पर लाभार्थी गरीबों के नाम सूची से हटा दिए गए। ग्रामीणों के अनुसार, नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रति लाभार्थी ₹2,000 मांगे जा रहे हैं। जब लोगों ने इसका विरोध किया, तो आवास सहायक ने कथित तौर पर कहा कि, यह ₹2,000 सिर्फ हमारे लिए नहीं हैं, इसमें से प्रखंड विकास पदाधिकारी तक हिस्सा पहुंचाना पड़ता है।
मजदूरों के नाम गायब, पंचायत सचिव के खाते में गई राशि
जांच में सामने आई गड़बड़ी की सबसे बड़ी कड़ी मस्टर रोल और योजना पंजी में हेराफेरी है। मस्टर रोल में न तो कार्य का विवरण है, न अवधि और न ही मजदूरों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान दर्ज हैं। इसके बावजूद 15वें वित्त आयोग की वह राशि, जो सीधे ग्रामीण मजदूरों के खातों में जानी चाहिए थी, नियमों को दरकिनार कर पंचायत सचिव के खाते में भेज दी गई।
क्या पूरे प्रखंड में घोटाला दहाई का आंकड़ा पार करेगा?
एकमा प्रखंड में कुल 18 ग्राम पंचायतें हैं। जब महज दो पंचायतों की शुरुआती जांच में ₹2.75 करोड़ की हेराफेरी उजागर हुई है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पूरे प्रखंड में भ्रष्टाचार का दायरा कितना बड़ा होगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लगा रहे गुहार
स्थानीय निवासियों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे एकमा प्रखंड की सभी 18 पंचायतों के पिछले 5 वर्षों के बैंक स्टेटमेंट, मस्टर रोल और पीसीसी सड़कों की भौतिक जांच कराई जाए। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो यह आंकड़ा दहाई करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।
सारण जिला प्रशासन और राज्य सरकार के आधिकारिक बयान का है इंतजार
इस संबंध में सारण के डीएम वैभव श्रीवास्तव से ‘स्टेट हंट’ ने बातचीत कर इस मामले पर आधिकारिक बयान लेने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल, इस पूरे मामले पर सारण जिला प्रशासन और राज्य सरकार के रुख का इंतजार है कि दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी या यह मामला भी जांच फाइलों के नीचे दब जाएगा।


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