August 26, 2026
Patna , Bihar
Bihar Crime

Bihar News : बेटे का नाम केस से हटाने के बदले दरोगा मांग रहा था रिश्वत, निगरानी विभाग ने दबोचा तो उड़ गए होश

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निगरानी विभाग

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने शुक्रवार को औरंगाबाद जिले के रिसिअप थाने में तैनात पुलिस अवर निरीक्षक उमेश कुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दरोगा को रिसिअप थाने के पीछे स्थित पंचायत भवन के पास गिरफ्तार किया गया है।

नाम केस से बाहर करने के लिए मांगी थी रिश्वत

रिसिअप थाना क्षेत्र के गणपत तेन्दुआ गांव निवासी लक्ष्मण राम ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। लक्ष्मण राम और उनके पड़ोसी के बीच हुए आपसी विवाद में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। रिसिअप थाना कांड संख्या 159/26 के जांच अधिकारी दरोगा उमेश कुमार थे। जांच अधिकारी उमेश कुमार पर आरोप था कि उन्होंने लक्ष्मण राम से केस से कुछ धाराएं हटाने और उनके दो बेटों का नाम प्राथमिकी से बाहर निकालने के बदले रिश्वत की मांग की थी। आरोपी दरोगा ने पीड़ित को यह धमकी भी दी थी कि यदि पैसे नहीं दिए गए, तो केस में और भी गंभीर धाराएं जोड़ दी जाएंगी।

 बिछाया गया जाल, रंगे हाथ पकड़ाया आरोपी

शिकायत मिलने पर निगरानी विभाग ने गुप्त जांच कराई, जिसमें रिश्वत मांगने का आरोप पूरी तरह सच पाया गया। इसके बाद वरीय पुलिस उपाधीक्षक संतोष कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। शुक्रवार को जैसे ही दरोगा उमेश कुमार ने पंचायत भवन के पास पीड़ित से 50 हजार रुपए लिए, पहले से मुस्तैद निगरानी की टीम ने उन्हें धर दबोचा। वरीय पुलिस उपाधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि पूछताछ के बाद आरोपी दरोगा को पटना स्थित विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

 2026 में भ्रष्टाचार पर निगरानी की ताबड़तोड़ कार्रवाई

निगरानी ब्यूरो ने इस साल भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई काफी तेज कर दी है। यह इस साल का 84वां ट्रैप केस है, जो पिछले 7 वर्षों में 31 जुलाई तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस साल दर्ज कुल 91 मामलों में से 84 ट्रैप केस हैं, जिनमें अब तक 83 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। इस साल रिश्वत के रूप में ली जा रही कुल 30,13,800 रुपए की राशि मौके से जब्त की जा चुकी है। वर्ष 2025 में कुल 101 ट्रैप केस दर्ज किए गए थे और 37.80 लाख रुपए बरामद हुए थे। निगरानी विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ यह अभियान और भी तेज किया जाएगा।

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