बिहार में यक्ष्मा यानी टीबी के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि के भुगतान की प्रक्रिया को अधिक सरल और त्वरित बनाने का निर्णय लिया है। अब मरीजों को पोषण भत्ता पाने के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने अब यह निर्णय लिया है कि मरीजों के पोषण भत्ता की राशि का भुगतान सीधे प्रखंड स्तर से किया जाएगा। यह व्यवस्था का पूरी मुस्तैदी से पालन हो इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों, अपर उपाधीक्षकों तथा संचारी रोग पदाधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
भुगतान में देरी खत्म करने के लिए बदले नियम
अब तक राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत यह भुगतान जिला स्तर से किया जाता था। इस व्यवस्था में कागजी कार्रवाई कई चरणों से होकर गुजरती थी। प्रखंड से दस्तावेज जिला लेखा प्रबंधक और फिर सिविल सर्जन तक पहुंचते थे। इसके बाद भुगतान होने पर भी निक्षय पोर्टल पर एंट्री करने में काफी समय लग जाता था। इस जटिल प्रक्रिया के कारण मरीजों को समय पर वित्तीय मदद नहीं मिल पाती थी। इसी प्रशासनिक विलंब को समाप्त करने के लिए सरकार ने अब भुगतान का अधिकार सीधे प्रखंड स्तर को सौंप दिया है।
एक महीने के भीतर भुगतान का सख्त निर्देश
नए नियमों के अनुसार, टीबी मरीज का उपचार शुरू होने के एक महीने के भीतर पोषण राशि का भुगतान सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि भुगतान में देरी या लापरवाही होती है, तो इसके लिए संबंधित प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड लेखा प्रबंधक सीधे जिम्मेदार होंगे। सरकार के निर्णय के अनुसार मरीज का इलाज शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
लंबित मामलों पर त्वरित कार्रवाई
राज्य स्वास्थ्य समिति ने स्पष्ट किया है कि जिला स्तर पर लंबित पड़े सभी भुगतान प्रस्तावों का निपटारा तीन कार्य दिवसों के भीतर किया जाए। इसके अलावा, जिन नाबालिग मरीजों के पास बैंक खाता नहीं है, उनके मामलों का समाधान करके 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के विशेष निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव स्तर पर की जा रही है समीक्षा
इस योजना की प्रगति की समीक्षा प्रति सप्ताह स्वयं मुख्य सचिव स्तर पर की जा रही है। सरकार का मानना है कि इस पहल से मरीजों को समय पर सही पोषण और दवाइयां मिल सकेंगी, जिससे वे शीघ्र स्वस्थ हो सकेंगे।

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