बिहार के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। छपरा स्थित जय प्रकाश विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले चार डिग्री कॉलेजों की सम्बद्धता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। शिक्षा विभाग के इस कड़े फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित कॉलेज प्रबंधनों में हड़कंप मच गया है।
किन कॉलेजों की मान्यता हुई रद्द ?
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, जिन चार कॉलेजों की सम्बद्धता समाप्त की गई है, उनमें छपरा के राठौड़ टोला स्थित आरडीएम डिग्री कॉलेज, सारण जिले के महमदा स्थित डॉ. भूषण प्रसाद यादव डिग्री कॉलेज, सारण के ही सकड्डी स्थित को-ऑपरेटिव डिग्री कॉलेज और बड़हरिया (सीवान के बड़हरिया स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर डिग्री कॉलेज शामिल हैं।
जांच में क्या खुलासा हुआ?
उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव शिशिर कुमार मिश्र ने जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति को आधिकारिक पत्र भेजकर इस निर्णय की जानकारी दी है। यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। जांच रिपोर्ट में यह बताया गया है कि वर्ष 2025 में अलग-अलग तिथियों में इन चार कॉलेजों को सम्बद्धता प्रदान की गई थी। हालांकि, इस प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के सर्वोच्च निकायों सीनेट और सिंडिकेट की अनिवार्य अनुशंसा अथवा अनुमोदन प्राप्त नहीं किया गया था। किसी भी महाविद्यालय को वैधानिक रूप से सम्बद्धता देने के लिए सीनेट और सिंडिकेट की मंजूरी आवश्यक होती है। इस प्रक्रियात्मक चूक और नियमों की अनदेखी को देखते हुए राज्य सरकार ने दी गई सम्बद्धता वापस ले ली है।
नामांकित छात्रों का क्या होगा?
मान्यता रद्द होने की खबर के बाद इन कॉलेजों में पढ़ रहे सैकड़ों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई थी। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके शैक्षणिक सत्र पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। सरकार ने जय प्रकाश विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि रद्द किए गए चारों कॉलेजों के नामांकित छात्र-छात्राओं का समायोजन आसपास के निकटतम मान्यता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में कराया जाए। इस पूरी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल सके।
यूनिवर्सिटी को सख्त चेतावनी
शिक्षा विभाग ने जेपी यूनिवर्सिटी प्रशासन को भविष्य के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। विभाग का कहना है कि आगे से किसी भी नए या पुराने संस्थान की सम्बद्धता का प्रस्ताव तब तक राज्य सरकार को न भेजा जाए, जब तक कि उसे सीनेट और सिंडिकेट की स्पष्ट मंजूरी प्राप्त न हो चुकी हो। विश्वविद्यालय व्यवस्था में सीनेट सर्वोच्च नीति-निर्धारक और अकादमिक निकाय होता है, जो शैक्षणिक दिशा तय करता है। वहीं सिंडिकेट मुख्य कार्यकारी निकाय के रूप में प्रशासनिक और वित्तीय गतिविधियों का संचालन करता है। राज्य सरकार के इस कदम को उच्च शिक्षा संस्थानों में मनमानेपन और अनियमितता पर नकेल कसने के एक कड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

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