निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की विशेष अदालत ने रिश्वतखोरी के एक 15 साल पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। निगरानी के विशेष न्यायालय के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाना के तत्कालीन अवर निरीक्षक रामाशंकर सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
10 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ हुआ था गिरफ्तार
मामला वर्ष 2011 का है। भोजपुर जिले के उदवंतनगर निवासी परिवादी अजीत कुमार सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उदवंतनगर थाना कांड संख्या-74/2011 में धाराओं को पक्ष में रखने और अनुकूल केस डायरी लिखने के एवज में तत्कालीन दरोगा रामाशंकर सिंह 10 हजार रुपए रिश्वत की मांग कर रहा था। निगरानी की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया और 15 अप्रैल 2011 को आरोपी दरोगा को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
कोर्ट ने सुनाई यह सजा
न्यायालय ने अभियुक्त रामाशंकर सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और धारा 13(2) के तहत दोषी पाया, जिसके बाद आरोपी दारोगा को धारा 7 के तहत 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 10,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड न जमा करने पर 3 महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भी भुगतनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी
इस मामले की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक गंगा राम ने की थी। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 8 गवाह पेश किए। बिहार सरकार की ओर से निगरानी के विशेष लोक अभियोजक किशोर कुमार सिंह ने प्रभावी तरीके से दलीलें पेश कीं, जिनके आधार पर आरोपी दरोगा को सजा दिलाना संभव हो सका।


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