बिहार सरकार ने महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वर्ष 2030 तक राज्य की एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का ऐलान किया है। सरकार का लक्ष्य इस पहल के जरिए बिहार की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करना और वर्ष 2047 तक राज्य को देश के सबसे सशक्त राज्यों में शामिल करना है।
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को मिलेगी प्राथमिकता
सात निश्चय-3 के तहत तय किए गए इस लक्ष्य में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत लगभग 50 लाख महिलाओं को दुग्ध सहकारी समितियों एवं उनसे जुड़े व्यवसायों से जोड़ा जाएगा, जिससे डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 80 प्रतिशत तक पहुँचाई जा सके।
प्रमुख घोषणाएं और योजनाएं
डेयरी और सुधा बिक्री केंद्र: राज्य की सभी पंचायतों में एक-एक सुधा बिक्री केंद्र खोला जाएगा। इसके लिए दीदी का चयन लॉटरी प्रणाली से होगा। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दुकान खोलने वाली महिलाओं को दूसरी और तीसरी किश्त के रूप में लगभग 60,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। साथ ही, महिलाओं को सुधा सखी, जीविका सुधा बिक्री केंद्र और दुग्ध संग्रहण केंद्रों से भी जोड़ा जाएगा।
पशु औषधि केंद्र: पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य के सभी 534 प्रखंडों में पशु औषधि बिक्री केंद्र खोलने का अभियान शुरू किया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहन राशि: प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली सभी वर्गों की छात्राओं को 30,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
अंतरजातीय विवाह सहायता: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को अंतरजातीय विवाह करने पर राज्य सरकार की ओर से 1.25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का कहना है कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में महिलाओं को प्राप्त 50 प्रतिशत आरक्षण के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्तमान में राज्य में लगभग 59 से 60 प्रतिशत महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित होकर आ रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

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