बिहार की राजधानी पटना में NEET-UG पेपर लीक मामले और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक व सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को पटना पुलिस ने हिरासत में ले लिया। देर रात पटना स्थित सीजेएम आवास पर पेशी के बाद अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया।
छात्रों के लिए जान देने को भी तैयार हूँ
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद तेज प्रताप यादव ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की मांगें पूरी तरह जायज हैं। सरकार को उनकी आवाज़ सुननी चाहिए और मांगें माननी चाहिए। हम पूरी मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। युवाओं के हक की लड़ाई के लिए अगर मुझे अपनी जान भी देनी पड़े, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा।
देर रात CJM आवास पर हुई पेशी
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने तेज प्रताप यादव को पटना के सिटी सेंटर मॉल के पास से हिरासत में लिया। शुरुआत में पुलिस उन्हें दानापुर थाने ले गई थी। हालांकि, समर्थकों और मीडियाकर्मियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा कारणों से उन्हें गुप्त रूप से किसी अन्य थाने में स्थानांतरित कर दिया गया। रात करीब 12 बजे तेज प्रताप को सीजेएम के पटना स्थित आवास पर पेश किया गया, जहाँ से अदालत ने उन्हें 14 दिनों के लिए बेऊर जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया।
सरकार के खिलाफ बोलना अब अपराध बन गया है
जनशक्ति जनता दल की वरिष्ठ नेता और बांकीपुर से प्रत्याशी रहीं वीणा मानवी ने इस गिरफ्तारी पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि वर्तमान शासन में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है और सरकार के खिलाफ जायज मांगों के लिए प्रदर्शन करने को भी अपराध बना दिया गया है।
राज्यव्यापी बंद के दौरान भड़की हिंसा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
यह पूरी कार्रवाई शनिवार को NEET पेपर लीक मामले और छात्र आंदोलन पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में विपक्षी दलों व सामाजिक संगठनों द्वारा बुलाए गए बिहार बंद के दौरान हुई। प्रदर्शन के दौरान पटना की सड़कों पर सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई। आक्रोशित छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ की और उन्हें पलट दिया। स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

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