सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार और भाजपा के गठबंधन पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने इस बदलाव को लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या और जनता के साथ महाधोखा करार दिया।
जनादेश का अपमान और पिछले दरवाजे से एंट्री
प्रशांत किशोर ने सबसे गंभीर आरोप मुख्यमंत्री की नियुक्ति की प्रक्रिया पर लगाया। उन्होंने कहा कि वोट किसी और को और कुर्सी किसी और को मिला। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने हालिया चुनाव में नीतीश कुमार के चेहरे और नाम पर भरोसा जताकर एनडीए को वोट दिया था। लेकिन सत्ता के समीकरण बदलते ही सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। प्रशांत किशोर ने कहा कि यह सीधे तौर पर जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सम्राट चौधरी को पिछले दरवाजे से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया गया है, जो न तो संवैधानिक रूप से गरिमापूर्ण है और न ही नैतिक रूप से सही।
फिर से नीतीश के नारे से पीछे हटी भाजपा
चुनावी अभियान की याद दिलाते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि भाजपा और एनडीए ने 25 से 30, फिर से नीतीश के नारे के साथ प्रचार किया था। जनता को यह भरोसा दिलाया गया था कि अगले कार्यकाल का नेतृत्व नीतीश कुमार ही करेंगे। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाते हुए कहा कि अब इस वादे से मुकर जाना भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे की असलियत को उजागर करता है।
रिमोट कंट्रोल वाली सरकार और बाहरी नियंत्रण
बिहार की संप्रभुता और शासन पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर ने यह दावा किया कि वर्तमान सरकार का रिमोट कंट्रोल बिहार में नहीं, बल्कि दिल्ली में बैठे केंद्र के बड़े नेताओं के हाथों में है। उन्होंने कहा कि बिहार की सत्ता का नियंत्रण राज्य के बाहर से हो रहा है, जिससे प्रदेश के स्थानीय हितों की अनदेखी होने का खतरा बढ़ गया है।

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