केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसके बाद देशभर में यह खबर सुर्खियों में छा गई।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह पूरा मामला 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। मामला बढ़ने पर सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी और जांच सीबीआई को सौंप दी। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें दो करोड़ से अधिक छात्र शामिल हुए। परिणाम 16 जुलाई को घोषित हुए, लेकिन इसके बावजूद जवाबदेही को लेकर छात्रों का आक्रोश कम नहीं हुआ।
इस्तीफे के पीछे की वजह
बिहार सहित कई राज्यों में हफ्तों तक चले छात्र आंदोलन, सड़क जाम और बिहार बंद जैसी घटनाओं ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया। विपक्षी दलों ने संसद के भीतर और बाहर लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। कई सांसदों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में जनता के भरोसे को बहाल करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि विवाद सामने आते ही सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए जांच, परीक्षा रद्दीकरण और पुनर्परीक्षा सुनिश्चित की।
आगे क्या होगा?
शिक्षा मंत्रालय अब खाली पद के लिए नए चेहरे की तलाश में है। अगले शिक्षा मंत्री की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 2027 से NEET सहित बड़ी परीक्षाओं में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करना होगा, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटनाक्रम आगामी राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि सभी दल छात्रों और शिक्षा सुधार के मुद्दे पर खुद को आगे रखने की कोशिश में जुटे हैं।

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