1970-1980 के दशक में बिहार के कई जिलों में जबरिया शादी खूब हुआ करती थी। गुजरते वक्त के साथ ऐसी शादियों में कमी तो हुई लेकिन इसपर पूर्ण प्रतिबंद नहीं लग पाया। ताजा मामला एक बार फिर हुआ है, लेकिन यह मामला बेगूसराय, खगड़िया, दरभंगा या फिर मधुबनी जिले का नहीं है बल्कि मामला पटना जिले के बाढ़ प्रखंड का है।
खूब हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
बाढ़ में हुए ‘पकड़ौआ विवाह यानी जबरन शादी में हाई-वोल्टेज ड्रामा खूब हुआ। बाढ़ सिविल कोर्ट परिसर स्थित रजिस्ट्री ऑफिस में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक दूल्हे ने कोर्ट मैरिज के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। युवक ने लड़की पक्ष पर बंधक बनाकर जबरन शादी कराने का आरोप लगाया है; वहीं लड़की पक्ष का दावा है कि दोनों पिछले दो महीनों से रिलेशनशिप में थे और अब युवक ₹20 लाख दहेज की मांग कर रहा है। हंगामा बढ़ता देख कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने दोनों पक्षों को हिरासत में लेकर बाढ़ थाना पुलिस को सौंप दिया।
छोटी बहन से करता था प्यार, बड़ी से करा दी जबरन शादी
इस मामले में खगड़िया निवासी दूल्हे नीतीश कुमार का आरोप है कि यह पूरी तरह से पकड़ौआ विवाह का मामला है। इस संबंध में नीतीश कुमार का कहना है कि वह बुधवार को बेगूसराय के जीडी कॉलेज गए थे, जहां उनकी मुलाकात सीता देवी से हुई। सीता ने उन्हें अपने घर यानी हाथीदह छोड़ने का अनुरोध किया। जब वह सीता को घर छोड़ने गए, तो उसके परिजनों ने उन्हें रात में वहीं रुकने का अनुरोध किया। इस बात के लिए नीतीश तैयार नहीं था। परिजनों का अनुरोध धीरे-धीरे जबरदस्ती में बदलने लगा। समय गुजरते गया और अब रात हो गई थी। नीतीश लगातार घर जाने की बात कहता रहा लेकिन उसकी बातों को वहां मौजूद हर कोई अनसुना करता रहा। नीतीश का आरोप है कि इस दौरान उसके साथ मारपीट भी की गई। और फिर वह वक्त भी आया जब रात में जबरन उनलोगों ने गांव के ही एक मंदिर में ले जाकर उसकी सीता देवी से जबरन शादी करा दी। नीतीश का दावा है कि वह सीता की छोटी बहन ईशा से शादी करने के लिए तैयार थे, लेकिन उनकी शादी इशा से नहीं बल्कि ईशा की बड़ी बहन सीता से जबरन करा दी गई। नीतीश ने यह भी आरोप लगाया कि सीता उन्हें लगातार फोन पर धमकी देती थी कि यदि उन्होंने बात नहीं की, तो वह जान दे देगी।
दुल्हन का पलटवार
दूसरी ओर, दुल्हन सीता देवी ने दूल्हे के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे प्रेम प्रसंग का मामला बताया है। पटना के एक अस्पताल में निजी नर्स के रूप में कार्यरत सीता देवी का कहना है कि दोनों की मुलाकात दो महीने पहले एक रिश्तेदार के विवाह में हुई थी। तब से दोनों के बीच लगातार फोन पर बातचीत हो रही थी और वे रिलेशनशिप में थे। सीता ने नीतीश को अपने अतीत के बारे में सब कुछ सच-सच बता दिया था कि 10 वर्ष पहले ही उनका अपने पहले पति से तलाक हो चुका है और उनकी एक बेटी भी है। नीतीश सब कुछ जानने के बाद ही इस रिश्ते में आगे बढ़े थे।
लड़की पक्ष का आरोप
वहीँ लड़की पक्ष का आरोप है कि मंदिर में अपनी मर्जी से शादी करने के बाद जब वे लोग कोर्ट मैरिज के लिए रजिस्ट्री ऑफिस पहुंचे, तो नीतीश के तेवर बदल गए। वह शादी को कानूनी रूप देने के बदले ₹20 लाख दहेज की मांग पर अड़ गया और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।
थाने पहुंची बात
रजिस्ट्री ऑफिस में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामे को देखकर कोर्ट परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप किया। दोनों पक्षों को शांत कराने के बाद उन्हें बाढ़ थाने की पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। इस मामले में अब पुलिस का बयान भी सामने आया है। इस घटना के संबंध में बाढ़ थाना पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। युवक द्वारा लगाए गए जबरिया यानी पकड़ौआ विवाह के आरोपों और लड़की पक्ष द्वारा लगाए गए दहेज के आरोपों, दोनों पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब जानिए क्या है पकड़ौआ विवाह?
ऐसा माना जाता है कि पकड़ौआ विवाह की शुरुआत 1970-1980 के दशक में खूब प्रचलित थी। हालाँकि अब इस तरह के विवाहों में बहुत हद तक कमी आई है। ऐसे जबरिया विवाह मुख्य रूप से बिहार के बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, समस्तीपुर और मधुबनी जैसे जिलों में खूब हुआ करते थे। 1970-1980 के दौर में सरकारी नौकरी पाने वाले लड़कों की ऐसी विवाहों के लिए बहुत मांग थी।
पकड़ौआ विवाह से लड़का पक्ष को रहता था डर
पकड़ौआ विवाह की वजह से घरवालों को डर लगा रहता था कि उनके बेटे का कहीं अपहरण न हो जाए। इस वजह से ज्वाइनिंग की जगह और समय को गुप्त रखा जाता था। जानकारों के मुताबिक़ मिथिला क्षेत्र समेत बिहार के 18 जिलों में 2024 तक 70 से ज्यादा पकड़ौआ विवाह के मामले सामने आ चुके हैं।
पकड़ौआ विवाह की वजह
पकड़ौआ विवाह की वजह का मुख्य कारण यह है कि बिहार में दहेज प्रथा काफी प्रचलित है। लड़की के माता-पिता चाहते थे कि उनकी बेटी की शादी किसी सरकारी नौकरी वाले या संपन्न लड़के से हो। ऐसे में जब लड़के की सरकारी नौकरी लगती थी, तो उसे अगवा कर शादी करवा दी जाती थी। यहाँ तक इस प्रथा का फायदा उठाते हुए कुछ गिरोह सक्रिय हो गए, जो पैसे लेकर शादी करवाने का ठेका लेते थे। अपहरण के बाद सामाजिक दबाव की वजह से ये शादियां सफल भी हो जाती थीं। अब समय के साथ पकड़ौआ विवाह के मामले कम हो गए हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसे मामले सामने आ जाते हैं। हाल ही में बेगूसराय में एक शिक्षक के पकड़ौआ विवाह का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें स्पष्ट रूप से दिखा था कि किस तरह जबरदस्ती सिंदूर डलवाकर शादी करवाई गई।
क्या यह सही है?
फिलहाल बाढ़ के जबरिया विवाह का मामला काफी चर्चे में है, लेकिन इस बात की जानकारी काफी महत्वपूर्ण है कि क्या यह कहानी जबरिया विवाह की है या फिर प्रेम प्रसंग की। अगर मामला प्रेम प्रसंग का है तो नीतीश को यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए, लेकिन अगर यह मामला जबरिया विवाह की है तब परिजनों को यह जरुर सोचना चाहिए कि जिस बेटी को उन्होंने पाल-पोश कर बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया, उस बेटी को शादी के नाम पर कहीं उसे और उसकी खुशियों को दुःख के कुएं में धकेल तो नहीं रहे?


