जंतर-मंतर पर देश की शिक्षा व्यवस्था और रोज़गार सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक तीखा और सख्त पत्र लिखा है। उन्होंने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक, अमानवीय और अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
सांसद सुधाकर सिंह ने पत्र में लिखा कि छात्र अपने मौलिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उन पर लाठीचार्ज और बर्बरता करके अत्यंत शर्मनाक रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस घटना से न केवल देश में, बल्कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों और मित्र देशों के बीच भी भारत की साख धूमिल हुई है। सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में इन्हीं युवाओं और छात्रों के भरोसे विश्वगुरु और उज्जवल भारत का सपना दिखाया गया था; लेकिन आज वही युवा अपनी बुनियादी मांगों के लिए सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पत्र के माध्यम से शिक्षा मंत्री और गृह मंत्री से तुरंत इस्तीफा लेने की मांग की है।
क्या लिखा पत्र में
सांसद सुधाकर सिंह ने पत्र में लिखा कि, “कल आपने और आपकी सरकार में बैठे तमाम मंत्री, सांसद और अधिकारियों ने शिक्षा और नौकरी व्यवस्था के सुधार के लिए आए लाखों छात्रों, युवाओं और आम जनों के जंतर-मंतर पर आयोजित शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन को देखा होगा। अगर आपको ठीक-ठीक याद हो, तो इन्हीं बच्चों और युवाओं के सहारे आप 2014 में देश के भविष्य को संवारने और भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना दिखाया करते थे। कल आपकी सरकार ने देश के बच्चों के साथ जिस तरह से मारपीट, लाठीचार्ज और दुर्व्यवहार किया है, उससे हम सभी भारतवासी शर्मिंदा हैं। एक सांसद के तौर पर मेरा सिर यह सोच कर शर्म से झुक गया कि हम अपने देश के युवाओं-छात्रों को शिक्षा और रोजगार तो दूर, अपने मौलिक लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सम्मान के साथ प्रदर्शन करने तक का भी अधिकार नहीं दे पा रहे हैं।
पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गाँधी के इस देश की शासन-व्यवस्था का अपने देश के बच्चों के प्रति ऐसी हिंसक प्रवृत्ति को देखना हम सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम जनों के परिकल्पना से परे है। आपका और आपके गृह मंत्री अमित शाह के इस आचरण से देश ही नहीं, दुनिया भर में भारत की बदनामी हो रही है। कई देशों में रहने वाले हमारे प्रवासी भारतीयों के अलावा दुनिया भर के कई मित्र देशों के लोगों ने भी भारत सरकार के द्वारा छात्रों-युवाओं के साथ किए गए इस दुर्व्यवहार को अलोकतांत्रिक, अमानवीय और अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
इन निहत्थे, निर्दोष और निरीह बच्चों के साथ ऐसा सलूक करके आप देश के हर उस नागरिक की निगाह में गिर गए, जो आपसे एक बुनियादी स्तर की ईमानदारी की आस लगाए बैठा था। मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि आपके अपने दल के भी कई नेता आपकी सरकार के इस आचरण को जायज़ नहीं कहेंगे, भले ही वे आपके डर से आज नहीं बोलें।
कल की इस घटनाक्रम में आपकी और आपकी सरकार की बची-खुची विश्वसनीयता और साख हमेशा के लिए ख़त्म हो गई है। बेहतर होगा कि आप शिक्षा मंत्री के साथ-साथ गृह मंत्री का भी इस्तीफ़ा ले लें। इतिहास आपको एक असफल, आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री के रूप में याद रखेगा, जिसने इस देश के भविष्य को गर्त में धकेल दिया। याद रखियेगा किसी भी मुल्क का इतिहास जबरन सत्ता में बने रहने वाले अधिनायकों से नहीं, लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले नागरिकों के गूँज से लिखा जाता है। सुधाकर सिंह ने अंत में लिखा है कि हालत में आप सुधार नहीं किए तो 2029 में भी आपको छिपकर पिछले दरवाज़े से ही जाना पड़ेगा।”

