बिहार के बांका जिले के चर्चित दोहरे हत्याकांड के मुख्य शूटर का पुलिस ने हाफ एनकाउंटर किया है। इस संबंध में पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद जब मुख्य शूटर सचिन सिंह को पुलिस हथियार बरामदगी के लिए जंगल ले गई थी, तब उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने की कोशिश की। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा चलाई गई जवाबी गोली शूटर के पैर में लगी, जिसमें वह घायल हो गया। फिर घायल आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
झारखंड से गिरफ्तारी और फिर तड़के मुठभेड़
घटना के सम्बन्ध में पुलिस का कहना है कि 5 जुलाई को हुए दोहरे हत्याकांड के बाद से ही शूटर सचिन सिंह फरार चल रहा था। बांका पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक दिन पहले उसे झारखंड की राजधानी रांची के एक होटल से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उससे सघन पूछताछ की, तो उसने कबूल किया कि हत्याकांड में इस्तेमाल की गई पिस्टल को उसने अमरपुर थाना क्षेत्र के बलिया गांव के जंगल में छिपा रखा है। शनिवार सुबह करीब तीन बजे पुलिस की एक विशेष टीम आरोपी सचिन को साथ लेकर हथियार बरामद करने बलिया के जंगलों में पहुंची।
पुलिस टीम पर झपट्टा मार चलाई गोली
अंधेरे का फायदा उठाकर सचिन सिंह ने पुलिसकर्मियों के चंगुल से खुद को छुड़ाने का प्रयास किया। पुलिस का कहना है कि उसने छिपाई गई पिस्टल को अचानक निकालकर पुलिस टीम पर ही फायरिंग झोंक दी और घने जंगल का फायदा उठाकर भागने लगा। अचानक हुए इस जानलेवा हमले से पुलिस टीम में हड़कंप मच गया, लेकिन जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। आत्मरक्षा में पुलिस की ओर से की गई जवाबी फायरिंग में एक गोली सचिन के पैर में जा लगी, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा।
पुलिस कस्टडी में हो रहा इलाज
मुठभेड़ के तुरंत बाद पुलिस ने घायल शूटर को हिरासत में लेकर इलाज के लिए बांका सदर अस्पताल पहुंचाया। वहाँ प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सुबह करीब पांच बजे बेहतर इलाज के लिए भागलपुर जिले के मायापुर स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल रेफर कर दिया। फिलहाल वह पुलिस कस्टडी में इलाजरत है।
आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है
बांका के पुलिस अधीक्षक अमितेश कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि इस दोहरे हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता सोमनाथ सिंह उर्फ सोम सिंह पहले ही बेगूसराय से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। शूटर सचिन सिंह की गिरफ्तारी रांची से की गई थी। निशानदेही पर जब पुलिस टीम उसे हथियार रिकवरी के लिए जंगल ले गई, तो उसने भागने की नीयत से पुलिस पर हमला किया। आत्मरक्षा में की गई पुलिसिया कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी है। आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और उससे पूछताछ में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।”
विवाद की वजह
शुरुआती जांच और पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि 5 जुलाई को हुए जघन्य हत्याकांड के पीछे पुरानी रंजिश और रास्ते का विवाद मुख्य वजह थी। इसी वजह से गुंजन सिंह (34 वर्ष) और सिंधु कुमार (33 वर्ष) की हत्या हुई थी। दोनों अमरपुर थाना क्षेत्र के धर्मराय गांव के रहने वाले थे। पुलिस अब इसी थ्योरी को केंद्र में रखकर जांच को आगे बढ़ा रही है।
क्या है पूरा मामला और क्यों हुई हत्या?
अमरपुर थाना क्षेत्र के धर्मराय गांव निवासी जगदीश सिंह के पुत्र सिट्टू सिंह तथा अर्जुन सिंह के पुत्र गुंजन सिंह 5 जुलाई की शाम बाइक से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान रतनपुर मकदूमा पंचायत के बलिया गांव के बाहर संथाली टोला के समीप पहले से घात लगाए बैठे अपराधियों ने उनकी बाइक रोककर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगे, जिससे सिट्टू सिंह और गुंजन सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल से तीन खोखे बरामद किए थे। हालांकि उस समय स्थानीय लोगों में इस बात की चर्चा थी कि जिस बाइक से दोनों जा रहे थे, उस पर दो नहीं बल्कि तीन युवक सवार थे। चर्चा यह भी थी कि इस घटना में तीसरा युवक भी घायल हुआ, जो घटनास्थल से किसी तरह निकल गया था।
परिजनों ने बनाया था नामजद आरोपी
इस मामले में मृतक गुंजन सिंह की बहन वीणा देवी ने फर्द बयान में गोरगम्मा पंचायत के अठमाहा गांव निवासी सचिन सिंह और सोमनाथ सिंह समेत अन्य लोगों को नामजद करते हुए साजिश के तहत दोनों युवकों की हत्या कराने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा कि सचिन सिंह उनके भाई को पहले से जान से मारने की धमकी देता था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित सोमनाथ सिंह उर्फ सोम कुमार सिंह को बेगूसराय के तैघड़ा से गिरफ्तार किया था, जबकि अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही थी।
बिहार विधान परिषद सदस्य ने कार्रवाई का दिया था आश्वासन
सिट्टू सिंह और गुंजन सिंह की हत्या की जानकारी मिलते ही बिहार विधान परिषद सदस्य संजय सिंह गुरुवार को धर्मराय गांव पहुंचे थे। उन्होंने मृतक गुंजन सिंह और सीटू सिंह के परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की थी और इस बात का भरोसा दिलाया था कि सभी आरोपितों की गिरफ्तारी करवाई जाएगी। उन्होंने अपनी संस्था महाराणा प्रताप फाउंडेशन की ओर से दोनों मृतकों के आश्रित परिवारों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। धर्मराय गांव में ही उन्होंने दूरभाष पर जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल से बातचीत कर मृतकों के परिजनों को सरकारी प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता राशि शीघ्र उपलब्ध कराने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा शेष आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था।
मृतक का भी रहा है रिकॉर्ड
पुलिस तफ्तीश में यह बात भी निकलकर आई है कि मृतक गुंजन सिंह का अतीत भी साफ-सुथरा नहीं था। साल 2020 में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास और एससी -एसटी एक्ट के तहत संगीन मामला दर्ज हुआ था। इसके अलावा ग्रामीणों के बीच उसकी छवि नशे के आदी व्यक्ति के तौर पर भी थी।
आगे की कार्रवाई
इस हाई-प्रोफाइल मामले में शामिल एक अन्य फरार आरोपी की शिनाख्त और उसके आपराधिक रिकॉर्ड को खंगालने में पुलिस जुटी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब शूटर सचिन सिंह को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की जाएगी, तो इस दोहरे हत्याकांड की कड़ियां पूरी तरह सुलझ जाएंगी। फिलहाल पूरे इलाके में पुलिसिया दबिश जारी है।

