बिहार में अब ऑनलाइन जुआ या डिजिटल जुआ खेलने वाले सावधान हो जाएं। वैसे लोगों पर अब सरकार की पैनी नजर रहेगी। ऑनलाइन जुआ या डिजिटल जुआ खेलने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दरअसल बिहार सरकार ने विधानसभा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही राज्य में 159 वर्ष पुराना बंगाल जुआ अधिनियम, 1867 निष्प्रभावी हो गया है। यह नया कानून न केवल पारंपरिक जुए, बल्कि ऑनलाइन ऐप्स, वेबसाइटों एवं अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित होने वाले जुए पर भी पूरी तरह से नकेल कसेगा।
लाया गया नया कानून
सदन में विधेयक पेश करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बदलते समय और तकनीक के विस्तार को देखते हुए नए कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि पुराने कानून के समय जुआ केवल ताश और पासे तक ही सीमित था। हालांकि, आज डिजिटल प्लेटफॉर्मों और ऑनलाइन ऐप्स के जरिए बड़े पैमाने पर जुआ खेला जा रहा है, जिसमें एक ही लेन-देन में भारी रकम का आदान-प्रदान होता है। इससे आर्थिक अपराध और सामाजिक कुरीतियां बढ़ रही हैं। 159 साल पुराने कानून के जरिए इस आधुनिक खतरे को रोकना संभव नहीं था।
जानिए कौन-कौन आएंगे दायरे में
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि नया कानून केवल जुआ खेलने वालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दायरा काफी व्यापक रखा गया है। नए प्रावधानों के तहत जुआ ऐप्स या डिजिटल प्लेटफॉर्म चलाने वाले व्यक्ति या संगठन के संचालकों पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जुए के संचालन के लिए वित्तीय सहायता या फंडिंग उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जुआ के माध्यम से कमीशन या दलाली हासिल करने वाले व्यक्ति और संस्थाएओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आदतन अपराधियों के लिए सख्त दंड का प्रावधान
सरकार का मानना है कि विधेयक में अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सजा के विभिन्न पैमाने तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि पहली बार अपराध करने पर कम अवधि की जेल और जुर्माना लगेगा। बार-बार अपराध करने पर अधिक कठोर कारावास और भारी जुर्माना लगेगा, ताकि आदतन अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
विपक्ष के सवालों पर सरकार का जवाब
चर्चा के दौरान राजद विधायक राहुल शर्मा सहित अन्य विधायकों ने विधेयक को लेकर कहा कि सरकार को इस पर अधिक विस्तार से विचार करना चाहिए था। विपक्ष के इन बातों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि जुआ से संबंधित कानून बनाना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय भी स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कहा कि 159 साल पुराने कानून को बदलने में हुई देरी को देखते हुए इसे जल्दबाजी कहना उचित नहीं है, बल्कि यह वर्तमान समय की अनिवार्य मांग थी।
सामाजिक बुराई के खिलाफ एकजुटता की अपील
सदन के अंत में विजय कुमार चौधरी ने कहा कि जुआ एक गंभीर सामाजिक बुराई और अपराध है। सरकार का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि समाज को इस कुरीति से मुक्त कराना है। विस्तृत चर्चा और शासकीय उत्तर के उपरांत बिहार विधानसभा ने इस विधेयक को सर्वसम्मति से ध्वनिमत द्वारा पारित कर दिया। अब इस नए कानून के लागू होने के साथ ही बिहार में ऑनलाइन, डिजिटल और तकनीक-आधारित जुए के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।

