आज अचानक उस परिवार का सब्र टूट गया। आँख से बहने वाले आंसू अब अंगार बरसा रहे थे। हालांकि गनीमत रही कि आक्रोशित लोगों ने दिल में धधक रही आग को आंसू के साथ बाहर निकलने नहीं दिया, वरना आज इस आग में रिफाइनरी भी जलते हुए दिख जाता। इसलिए लाठीचार्ज का गुस्सा सिर्फ तोड़-फोड़ तक ही सिमट कर रह गया।
ड्यूटी पर हुआ था घायल
मामला 20 जून का है ज़ब श्याम सुंदर पाठक रोज की तरह अपने घर से काम पर निकला। वह दिन उसके और उसके परिवार के लिए काला दिन था। काम करने के दौरान सुन्दर पाठक के शरीर पर लोहे का पाइप गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। साथ में काम करने वाले सहकर्मियों ने श्याम सुन्दर पाठक को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि इलाज के दौरान 29जून को श्याम सुंदर सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई।
रिफाइनरी के प्रबंधक ने दिया था 17 लाख मुआवजे का आश्वासन
मौत के बाद परिजन शव को लेकर रिफाइनरी गेट पर पहुंचे। प्रबंधक ने परिजनों को तत्कालीन कुछ राशि देकर 17 लाख मुआवजा देने का आश्वासन दिया। आश्वासन मिला कि सारा पैसा अकाउंट में चला जाएगा। अब परिजन बैंक के पासबुक में राशि के आने का इंतजार करने लगे, लेकिन 17 लाख की राशि अकाउंट में नहीं आई। फिर परिजनों ने प्रबंधक से कई बार बात करने की कोशिश भी की, लेकिन प्रबंधक ने न तो मुलाक़ात की और न उस मुद्दे पर कोई बात की।
कल से शुरू हुआ प्रदर्शन
फिर परिजन और कुछ उनके ग्रामीण रिफाइनरी के मुख्य द्वार संख्या -1 पर मंगलवार से धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस धरना प्रदर्शन से रिफाइनरी के खोखले वायदे जगजाहिर होने लगे। अपनी किरकिरी को देखते हुए रिफाइनरी प्रबंधक ने बेगूसराय पुलिस को बुलाया। बिहार पुलिस को भी अपने वर्दी की गर्मी को दिखाने का खुला ऑफर मिल गया। फिर क्या था, पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठियाँ भांजी, जिसमें कई मजदूर घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने भी लाठी का जवाब देते हुए जमकर तोड़फोड़ की। गुस्साई भीड़ ने कई दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ-साथ कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे, एलईडी, ब्रैकेटिंग तथा अन्य उपकरणों पर अपना गुस्सा उतारा।
आश्वासन के बाद भी मुआवजा में आनाकानी क्यों?
अब बिहार पुलिस तोड़फोड़ करने वाले प्रदर्शनकारियों पर प्राथमिक भी दर्ज करेगी, लेकिन सवाल यह है कि उन प्रदर्शनकारियों जिनपर पुलिस ने लाठी चार्ज कर बहादुरी का मेडल लेना चाहती है, उन प्रदर्शनकारियों की गलती क्या है? रिफाइनरी प्रबंधक के द्वारा परिवार को मुआवजा देने का आश्वासन दिया तो फिर राशि देने में आनाकानी क्यों?
लाठीचार्ज किसने की?
इस पूरे मसले पर रिफाइनरी का दावा है कि लाठी चार्ज हमने नहीं करवाया, यह काम तो पुलिस का है। वहीं बिहार पुलिस का कहना है कि मेरा काम शांति व्यवस्था को बहाल करना है न कि लाठी चार्ज करना, यह काम तो सीआईएसएफ के जवानों ने किया है।

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