राजधानी पटना में पूर्व मुखिया संजय कुमार यादव का शव एक खेत से बरामद हुआ। शव मिलने की खबर फैलते ही स्थानीय ग्रामीण और मृतक के परिजन आक्रोशित हो गए। गुस्साए लोगों ने बिहटा-बिक्रम मुख्य मार्ग को जाम कर और टायर जलाकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर तीन थानों की पुलिस बल को तैनात किया गया है। घटना बिहटा थाना क्षेत्र अंतर्गत राघोपुर पंचायत की है।
सुबह खेत में मिला शव
घटना के संबंध में स्थानीय लोगों ने बताया कि शुक्रवार सुबह जब राघोपुर गांव के ग्रामीण खेतों की तरफ जा रहे थे, तभी उन्होंने तरवां स्थित एक बोरिंग के पास पूर्व मुखिया संजय कुमार यादव का शव पड़ा देखा। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना परिजनों और स्थानीय पुलिस को दी।
परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि संजय यादव की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई है और साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को खेत में फेंक दिया गया है। आक्रोशित लोग आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं।
जांच में जुटी FSL की टीम, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घटना की सूचना मिलते ही बिहटा थाना पुलिस की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया है। पुलिस शव को पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया में जुट गई है। हालांकि घटना के संबंध में बिहटा थानाध्यक्ष ने कहा कि मृतक के शरीर पर शुरुआती जांच में ऐसे कोई प्रत्यक्ष निशान नहीं मिले हैं, जिससे तत्काल हत्या की पुष्टि की जा सके। उन्होंने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। परिजनों की तरफ से अभी तक कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया है और न ही किसी पर नामजद आरोप लगाया गया है। आवेदन मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आपराधिक इतिहास और पुलिस की दबिश
इस संबंध में पुलिस का कहना है कि मृत पूर्व मुखिया संजय कुमार यादव का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वे पिछले कई महीनों से फरार चल रहे थे।
- हथियारों की बरामदगी: अक्टूबर 2025 में पटना पश्चिम के तत्कालीन सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में संजय यादव के घर पर बड़ी छापेमारी हुई थी। उस दौरान घर से एक अवैध राइफल और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इस मामले में संजय यादव के छोटे भाई मनोज कुमार यादव को गिरफ्तार किया गया था, जबकि संजय यादव फरार चल रहे थे।
- दो दिन पहले हुई थी छापेमारी: इसी अवैध हथियार मामले में कोर्ट द्वारा वारंट जारी होने के बाद, स्थानीय पुलिस दो दिन पहले भी संजय यादव की गिरफ्तारी के लिए उनके घर पर दबिश देने पहुंची थी, लेकिन वे पुलिस के हाथ नहीं आए।
पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच दो मुख्य पहलुओं पर कर रही है- पहला यह कि क्या यह वाकई हत्या का मामला है या मौत की वजह कुछ और है? दूसरा यह कि क्या इस मौत के पीछे कोई आपसी रंजिश या पुराना आपराधिक विवाद है? वहीँ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। तब तक इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

