बिहार में पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बट्टा लगा है। बिहार पुलिस की घेराबंदी को ठेंगा दिखाते हुए विचाराधीन कैदी सुरक्षा में लगे बिहार पुलिस के वीर बांकुरों के सामने फरार हो गया। यह घटना तब हुई है, जब उसी जिले में सात महीना पूर्व ऐसी घटना हो चुकी है। मामला नवादा जिले की है और यह घटना सदर अस्पताल के कैदी वार्ड की है। अब जिले में बिहार पुलिस की कार्यशैली की खूब किरकिरी हो रही है।
तबीयत बिगड़ने पर कराया गया था भर्ती
घटना के संबंध में पुलिस का कहना है कि फरार बंदी की पहचान धमौल थाना क्षेत्र निवासी अलाउद्दीन के पुत्र असगर मलिक उर्फ दारा के रूप में हुई है। वह चोरी के एक मामले में न्यायिक हिरासत के तहत नवादा मंडल कारा में बंद था। गुरुवार को जेल के भीतर उसने अचानक चक्कर आने और बेहोश होने की शिकायत की थी, जिसके बाद जेल प्रशासन ने उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल के कैदी वार्ड में भर्ती कराया। शुक्रवार को उसका सीटी स्कैन भी कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट सामान्य आई थी।
बहाना बनाकर हुआ फरार
शुक्रवार की शाम कैदी वार्ड में तैनात पुलिसकर्मियों को झांसा देते हुए असगर मलिक ने शौच जाने की बात कही। पुलिसकर्मियों ने जैसे ही उसे थोड़ी ढील दी, वह नजर बचाकर अस्पताल परिसर से भाग निकला। काफी देर तक जब वह वापस नहीं लौटा, तब सुरक्षा में तैनात जवानों के हाथ-पांव फूलने लगे।
छापेमारी में जुटी पुलिस
कैदी के फरार होने की सूचना मिलते ही नगर थानाध्यक्ष उमाशंकर सिंह दलबल के साथ सदर अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिया, ताकि कैदी के भागने की दिशा और उसके मददगारों का पता लगाया जा सके। पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
सदर अस्पताल के कैदी वार्ड से महज 7 महीने पहले भी एक कैदी इसी तरह चकमा देकर फरार हो गया था। बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की घोर लापरवाही के कारण ही अपराधी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने में कामयाब हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस प्रशासन की खूब किरकिरी हो रही है।

